भ्रष्टाचारियों और घूसखोरों के लिए ‘कहर’ बनी मोदी सरकार – 15 अधिकारियों को किया ‘जबरन रिटायर’

2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी जी ने देश की जनता से एक वादा किया था कि ‘न खाऊंगा – न खाने दूंगा’, और इसका असर उनके पिछले कार्यकाल में साफ देखने को मिला था। मोदी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में स्विस बैंक में जमा काले धन से लेकर, देश में रहकर भ्रष्टाचार और घूसखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लिए थे।

ठीक उसी तरह ‘भ्रष्टाचार पर वार – फिर एक बार मोदी सरकार’ यह स्लोगन 2019 लोकसभा चुनाव में हर शख्स की ज़ुबान पर था, और खास बात यह है कि मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में भी भ्रष्टाचारियों और घूसखोरों को बिलकुल भी बक्शने के मूड में नहीं है।

मंगलवार, 18 जून को मोदी सरकार ने करप्शन के खिलाफ एक और बड़ा फैसला लेते हुए 15 सीनियर अफसरों को जबरन रिटायर करने का फैसला लिया है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इन 15 अफसरों की लिस्ट में मुख्य आयुक्त, आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्त स्तर के अधिकारी भी शामिल है। इनमें से ज्यादातर अफसरों पर भ्रष्टाचार और घूसखोरी के आरोप हैं।

मोदी सरकार के इस फैसले से यह तो स्पष्ट हो गया है कि केंद्र सरकार रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले अफसरों को बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेगी। बताया जा रहा है कि सरकार लम्बे समय से ऐसे अफसरों की सूची बनाने का कार्य कर रही थी, लेकिन इसके विषय में किसी को भनक तक नहीं लगने दी गई।

ये अफसर जबरन किये गए रिटायर

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और कस्टम (Central Board of Indirect Taxes and Customs) विभाग के जबरन रिटायर किए गए अफसरों का पद और नाम इस प्रकार है- प्रिंसिपल कमिश्नर डॉ. अनूप श्रीवास्तव, कमिश्नर अतुल दीक्ष‍ित, कमिश्नर संसार चंद, कमिश्नर हर्षा, कमिश्नर विनय व्रिज सिंह, अडिशनल कमिश्नर अशोक महिदा, अडिशनल कमिश्नर वीरेंद्र अग्रवाल, डिप्टी कमिश्नर अमरेश जैन, ज्वाइंट कमिश्नर नलिन कुमार, असिस्टेंट कमिश्नर एसएस पाब्ना, असिस्टेंट कमिश्नर एसएस बिष्ट, असिस्टेंट कमिश्नर विनोद सांगा, अडिशनल कमिश्नर राजू सेकर डिप्टी कमिश्नर अशोक कुमार असवाल और असिस्टेंट कमिश्नर मोहम्मद अल्ताफ।

कुछ दिन पहले वित्त मंत्रालय से भी किये गए थे ‘जबरन रिटायर’

इस निर्णय से कुछ दिन पूर्व ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सख्त फैसला लेते हुए नियम 56 के तहत 12 दागी अफसरों को जबरन रिटारयमेंट (Compulsory Retirement) पर भेजने का फैसला किया था। इन 12 अधिकारियों में अशोक अग्रवाल (आईआरएस 1985), एसके श्रीवास्तव (आईआरएस 1989), होमी राजवंश (आईआरएस 1985), बीबी राजेंद्र प्रसाद, अजॉय कुमार सिंह, बी अरुलप्पा, आलोक कुमार मित्रा, चांदर सेन भारती, अंडासु रवींद्र, विवेक बत्रा, स्वेताभ सुमन और राम कुमार भार्गव शामिल थे।

क्या है नियम 56?

डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ऐंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स के नियम 56 का प्रयोग सरकार ऐसे अधिकारियों पर कर सकती है जो अपना 30 साल का कार्यकाल पूरा कर चुकें हो और जो 50 से 55 की आयु के हों। ऐसा करने के पीछे सरकार का मकसद नॉन-फार्मिंग सरकारी सेवक को रिटायर करना होता है।

Rohit Gangwal
By Rohit Gangwal , June 18, 2019

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